Home Hindi श्रीधाम वृंदावन में प्रारंभ हुई तीन दिवसीय समन्वय बैठक

श्रीधाम वृंदावन में प्रारंभ हुई तीन दिवसीय समन्वय बैठक

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक प.पू. श्री मोहन राव भागवत जी और सरकार्यवाह श्री भय्याजी जोशी द्वारा भारत माता की प्रतिमा को पुष्पार्चन कर शुक्रवार को त्रिदिवसीय समन्वय बैठक (1 से 3 सितंबर)  का प्रारम्भ हुआ।

सह सरकार्यवाह श्री सुरेष जी सोनी ने बैठक की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक विचारधारा को लेकर हम सभी संगठन समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। बदलते हुए विश्व परिदृष्य, देश की परिस्थति और अपने संगठन की स्थिति का योग्य आंकलन करते हुए हम सभी को अपने क्षेत्रों में आगे बढना है। किसी भी कार्य के उपेक्षा, विरोध और स्वीकार यह तीन पड़ाव होते है, पहले दो पड़ाव पार कर हम समाज में स्वीकृति का अनुभव कर रहे हैं। विश्व परिदृश्य, देश की वर्तमान स्थिति और अपने संगठन की सांगठीक स्थिति का योग्य आकलन एवं समझ हो, इस हेतु से अनेक विषयों पर यहां तीन दिन में चर्चा होगी।

समन्वय बैठक से पूर्व एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते मनमोहन जी वैद्य ने कहा कि वर्ष में इस प्रकार की दो बैठकों का आयोजन किया जाता है। जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपने अनुभवों का आदान प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज संघ के स्वंयसेवक शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, स्वावलम्बन, आर्थिक, वैचारिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं और समाज जीवन के हर स्तर में सक्रिय होने के कारण वहां से प्राप्त अनुभवों को सांझा करनाए कार्य की विकास की दृष्टि से महत्व होता है। उन्होंने कहा कि यह बैठक निर्णय करने वाली नहीं है अपितु यहां वरिष्ठ अधिकारियों का अपने अनुभवों का समन्वय और आदान प्रदान होगा। बैठक में आर्थिक, आंतरिक सुरक्षा व अन्य समसामयिक विषयों पर चर्चा होगी।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि सभी संगठन अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं और अपनी कार्यपद्धिति का निमार्ण स्वयं करते हैं। जिन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है, उन्हें संघ की रचना समझनी चाहिए।

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