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चित्रकूट ग्रामोदय मेले में दिखा सांस्कृतिक भारत

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय और नानाजी देशमुख की जन्मशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दीनदयाल शोध संस्थान की ओर से चार दिवसीय ग्रामोदय मेले का आयोजन चित्रकूट में किया गया है। मेले के उद्घाटन समारोह से पूर्व शुक्रवार को सुबह नगर में शोभायात्रा निकाली गई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के समूह ने शोभायात्रा का नेतृत्व किया। इसमें देश के विभिन्न राज्यों के 250 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। जब शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही थी, तब चित्रकूट में लघु भारत की झलक दिखाई दी। यात्रा में शामिल कलाकार अपने राज्यों की संस्कृति और परंपरा को झांकियों और लोकनृत्यों के माध्यम से अभिव्यक्त कर रहे थे।

शोभायात्रा रामघाट से प्रारंभ होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए आयोजन स्थल ग्रामोदय मेला परिसर पहुंची। इस दौरान कलाकारों ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत कर सबका दिल जीत लिया। एक साथ पंक्तिबद्घ होकर नृत्य कर रहे इन कलाकारों का उत्साह देखते ही बन रहा था। हिमाचल प्रदेश से आए कलाकारों ने महाभारत युद्घ पर आधारित

लोकनृत्य ठोडा की प्रस्तुति किया। कौरव और पांडव दल में विभक्त इस झलकी में धनुष-बाण, फरसा, कटार और ढोल नगाड़े का अनूठा चित्रण पेश किया गया। सागर से आई महिला कलाकारों ने लोकरंग बधाई नृत्य और चित्रकूट के कलाकारों ने लोकनृत्य राईकोलाईकर्मा प्रस्तुत किया। सागर की कलाकार निशा ने बताया कि यह लोकनृत्य शादियों एवं खुशी के अवसर पर किए जाते हैं। छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों से आये कलाकारों ने रामनामी, पंडवानी, नाचा और पंथी गायन की प्रस्तुतियां दी, जिसमें उन्होंने वहां की संस्कृति को अपने नृत्य के माध्यम से पेश किया। उतराखंड के कलाकारों ने हिलजामा की प्रस्तुति दे कर सबका मन मोह लिया। केरल के कलाकारों ने पुलीकली टाइगर और कुमाठी का चित्रण पेश किया।

जैविक पद्धति से बढ़ेगी उपज

दीनदयाल शोध संस्थान के तत्वाधान में आयोजित ग्रामोदय मेला में कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से जैविक कृषि की विस्तृत जानकारी किसानों को दी जा रही है। यहाँ कृषि वैज्ञानिक उदाहरणों के माध्यम से बता रहे हैं कि जैविक पद्धति से खेती करने पर अधिक उपज प्राप्त होती है। यहाँ किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया जा रहा है। प्रदर्शनी का आयोजन कृषि विभाग की ओर से किया गया है।

कृषि प्रदर्शनी के प्रभारी एवं कृषि विशेषज्ञ रावेन्द्र सिंह ने बताया कि हमारे देश में कृषि की पैदावार अच्छे मानसून पर निर्भर है। मानसून पर खेती की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने हर खेत में पानी पहुँचाने के लिये प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना शुरू की है। इस योजना में तीन मंत्रालय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धान मंत्रालय, ग्रामीण विकास विभाग एवं कृषि मंत्रालय शामिल हैं। उनका कहना है कि किसानों की समस्या दूर करने के लियेे सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हर किसान अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण मृदा परीक्षण केन्द्र पर जाकर कराएं। इसके लिए सरकार एक गांव को चार भागों में बांट कर प्रत्येक किसान के खेतों की मिट्टी परीक्षण करके अनेक तत्वों की पहचान कर, सम्बधित सलाह देती है। इस तरीके से यह लाभ होगा कि खेतों की मिट्टी के अनुसार पैदावार की जाएगी। किसान भाइयों के लिये सरकार किफायती दर पर हैब्रिड बीज, जैविक खाद्य का सहकारी समितियों के माध्यम से वितरण करवाती है। कृषि जागरूकता के लिए दो गांवों में एक किसान मित्र की नियुक्ति की जा रही है, जो अन्य किसानों को वैज्ञानिक ढंग से खेती करने के लिये जागरूक करते है।

रावेन्द्र सिंह का कहना है कि यदि कुछ गांवों को मिलाकर सभी के लिये गौभ्यारण बनाकर उनके रहने और खाने एवं पीने के पानी की व्यवस्था की जाये तो किसानों की फसल को पशुओं के नुकसान से बचाया जा सकता है। परन्तु इन सब के लिये सरकार के साथ जनभागीदारी अनिवार्य है।

घर से दूर विद्यार्थियों को अपनेपन का अहसास

ग्रामोदय मेले में जनजातीय क्षेत्रों के छोटे-छोटे बच्चों की उपस्थिति और सहभागिता नानाजी की समग्र ग्रामीण विकास की सोच को साकार करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। नानाजी देशमुख द्वारा चित्रकूट में स्थापित रामनाथ आश्रम शाला के विद्यार्थियों ने मेले में प्रदर्शित स्टॉलों के माध्यम से ग्रामीण संस्कृति को करीब से महसूस किया। लगभग पचास किलोमीटर के आसपास स्थित जनजातीय क्षेत्रों से यहां रहकर पढऩे आए इन बच्चों की उपस्थिति ने अन्य लोगों को भी ग्रामीण संस्कृति से जुडऩे के लिए जागरूक करने का काम किया है। मेले में भ्रमण के दौरान अनुशासित बच्चों ने बाल उत्पीडऩ की रोकथाम को लेकर संदेश का वितरण भी किया। विद्यार्थियों के समन्वयक एवं शिक्षक शंकरसिंह ने बताया कि जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा से वंचित तीन सौ विद्यार्थी इस आवासीय शाला में रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं। शाला में करीब दो सौ छात्र एवं सौ छात्राएं अध्ययन रत हैं।

इस मौके पर ग्रामीण संस्कृति को करीब से जानने को लेकर छोटे – छोटे बच्चों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। ऐसे ही तीसरी कक्षा के छात्र टिकम ने बताया कि मेले में बहुत अच्छा लगा, जनजातीय संस्कृति को देखकर उन्हे अपने गांव की याद ताजा हो गई। इसी तरह छात्र अनिल सिंह ने भी मेले को मनोरंजक और सीखने वाला बताया। बेहतर शिक्षा और उज्जवल भविष्य की चाह में अपनेे घर और परिवार से दूर इन बच्चों के लिए ग्रामोदय मेला अपनेपन के कुछ लम्हे लेकर आया है। मेले घूमने आए इन बच्चों की मुस्कान को देखकर चित्रकूट जैसे छोटे स्थान में लगे ग्रामोदय मेले की सार्थकता स्वत: ही प्रकट हो रही है।

आजीविका अभियान ने बढ़ाया स्वरोजगार

मध्यप्रदेश का पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का ‘आजीविका अभियान प्रदेश में स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहा है। स्वरोजगार के लिए लोगों को प्रेरित करने के लिए आजीविका मिशन का स्टॉल ग्रामोदय मेला में आया है। पन्ना से आईं दिव्यांग भागवती यादव तथा उनके पति दशरथ यादव ने बताया कि आजीविका मिशन से जुड़कर उन्होंने आँवले का मुरब्बा, अचार, कैण्डी, जूस और सुपाड़ी का अपना छोटा-सा काम शुरू किया है। उन्होंने इसका प्रशिक्षण भोपाल और जबलपुर में प्राप्त किया है। अब दूसरों को नि:शुल्क प्रशिक्षण देते हैं।

श्री यादव ने बताया कि उनके ‘माँ दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष उनकी पत्नी हैं। इस समूह में उनके साथ 10 अन्य महिलाएं भी कार्य करती हैं। अपने गाँव के एक व्यक्ति से प्रेरित होकर सन् 2002 से दशरथ सिंह इस कार्य से जुड़े हैं। एक वर्ष पूर्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग  के ‘आजीविका अभियान से जुड़कर तीन लाख रुपये कि सहायता प्राप्त की। अपनी पत्नी के सहयोग से प्रतिवर्ष डेढ़ से दो लाख रुपये तक की बचत कर लेते हैं। स्वयं के कार्य के साथ-साथ आज दशरथ यादव दूसरों को भी प्रशिक्षित कर स्वावलम्बी बना रहें  हैं।

 सर्वव्यापी हो गए हैं नानाजी

नानाजी देशमुख जब जीवित थे, तब एक आत्मा थे अब वे सर्वव्यापी हो गए हैं। मैं नानाजी की बहुत लाड़ली थी। वे मुझमें हमेशा जीवित रहेंगे। यह बात केंद्रीय जल एवं संसाधन मंत्री उमा भारती ने कही। वे ग्रामोदय मेले के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठि में ‘समग्र ग्रामीण विकास की चुनौतियां एवं समाधान’ विषय पर बोल रही थीं।

सुश्री उमा भारती ने बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का संदेश देते हुए कहा कि जितना खर्च आप बेटी की शादी में करते हैं, उतना खर्च आप बेटी की पढ़ाई में कर दीजिए। आपको शादी में ज्यादा खर्चा नहीं करना पड़ेगा। बेटी खुद आत्मनिर्भर हो जाएगी। वहीं आजीवन स्वास्थ्य की परिकल्पना विषय पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए अच्छा खाना जरूरी है। इससे तन और मन दोनों अच्छा रहते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. एनएन मेहरात्रा ने आजीवन स्वास्थ्य में आयुर्वेद विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उनके बाद डॉ. पीसी शर्मा एवं डॉ. आरएस शर्मा ने आयुर्वेद उपचार की लोकप्रियता और महत्व पर प्रकाश डाला। आयुर्वेद महाविद्यालय रीवा के प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने स्थानीय जड़ी-बूटियों एवं परंपरागत चिकित्सा के माध्यम से स्वास्थ्य उपचार विषय पर अपने विचार व्यक्त किए।

मुंह के कैंसर रोगी सर्वाधिक भारत में : चित्रकूट प्रोजेक्ट यूके के चेयरमैन डॉ. नरेश शर्मा ने बताया कि विश्व में सर्वाधिक मुंह के कैंसर पीडि़त भारत में हैं। इस जानलेवा रोग को रोकने के लिए उपचार के साथ-साथ जागरूकता भी जरूरी है। संगोष्ठी में चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर पांडे ने जन स्वास्थ्य परियोजनाएं एवं संयुक्त संचालक जेएन काण्डपाल ने कुपोषण विषय पर जानकारी दी।

जीवित रहते रक्तदान, मृत्यु उपरांत नेत्रदान : कार्यक्रम के दूसरे सत्र में दीनदयाल उपाध्याय ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. बीके जैन ने युवाओं को रक्तदान एवं नेत्रदान के प्रति जागरूक किया। नेत्र रोग विषेशज्ञ डॉ. जैन ने सभागार में मौजूद लोगों को नेत्र संबंधी रोगों की जानकारी दी। उसके निदान के बारे में बताया साथ ही जीवित रहते रक्तदान एवं मृत्यु उपरांत नेत्रदान करने की अपील भी की।

अब रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ता

दीनदयाल शोध संस्थान की ओर से आयोजित ग्रामोदय मेले में अनेक स्वयं सहायता समूहों ने अपनी प्रदर्शनी लगाई। भरतपुर की सुनीता भी अपने स्वयं सहायता समूह ‘हथकरघा एवं दस्तकारी समिति मर्यादित भरतपुर’ की प्रदर्शनी लेकर आईं हैं। वह पाँच वर्षों से मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। वर्तमान में उनके स्वयं सहायता समूह में लगभग 150 कर्मचारी काम कर रहे हैं। उनके प्रयास से अब आसपास के लोगों को रोजगार के लिए अन्य जगह पलायन नहीं करना पड़ता। लोग अपने ही गाँव में रहकर कमाई कर रहे हैं। उनका समूह हाँथों से बुने वस्त्र बनाते हैं।

आठ हजार रुपये तक हो गई आय : सुनीता बताती हैं कि इस समूह के प्रारंभ होने के बाद से अब हम लोग आत्मनिर्भर हो रहे हैं। हमें रोजगार के लिए इधर-उघर भटकना नहीं पड़ता। हमारा समूह पुरुषों के लिये कुर्ता-पजामा, सर्ट, गमछा सहित अन्य वस्त्र तैयार कर बिक्री करता है। महिलाओं के कपड़े भी बनाए जाते हैं। यहाँ पर काम करने वालों की प्रति व्यक्ति आय सात से आठ हजार रुपये प्रति माह है। उन्होंने बताया कि हमारे समूह का स्टॉल प्रति वर्ष देशभर के लगभग 40 स्थानों पर जाता है।

 

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